Thursday, December 30, 2010

प्रॉपर्टी गाइड

मैंने कुछ दिनों पहले पड़ा था  की  मध्यप्रदेश में बड़े शहरों इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में जमीन, मकान, दुकान की जानकारी प्रॉपर्टी गाइड से मिलेगी. इन शहरों के विकास प्राधिकरण उनकी अचल सम्पत्ति की ये सारी सूचनाएं लोगों को एक प्रापर्टी गाइड में उपलब्ध हो जाएँगी जानकारी के मुताबिक इंदौर विकास प्राधिकरण ने गाइड प्रकाशित कर दी है और मार्केटिंग सेल गठित कर दिया गया है. इस सेल ने एक दिसंबर से काम शुरू कर दिया . प्रापर्टी गाइड संपत्ति खरीददारों को ठगे जाने से बचने में मददगार साबित होगी. इंदौर विकास प्राधिकरण ने सितम्बर 2010 तक की स्थिति में अपनी 100 से ज्यादा योजनाओं के तहत सभी उपलब्ध और खाली विभिन्न भूखंडों, निर्मित जगहों और फ्लेट्स की जानकारी प्रापर्टी गाइड में संकलित कर ली है मुझे यह एक सार्थक प्रयास लगा 


ऐसा छत्तीसगढ़ होउसिंग बोर्ड और छत्तीसगढ़ के समस्त विकास प्राधिकारणों को करना चाहिए मेरा अब तक का रियल एस्टेट में जो अनुभव है उस के आधार पर मैं कह सकता हु की  होउसिंग बोर्ड और छत्तीसगढ़ के समस्त विकास प्राधिकारणों की प्रोजेक्ट कहा कहा चल रहे है और यह कब बिक्री के लिए मार्केट में आते है कुछ ही लोगो को पता चलता वो भी न्यूज़ पेपर में छोटी सी निविदा के माध्यम से पता चलता या कभी अखबारों में विज्ञापनों के माध्यम से या कभी कभार मेले के स्टालों में मुझे लगता है की प्रोजेक्ट की मार्केटिंग की यह नाकाफी है उस की बढ जब खरीदार जब इन कार्यालयों में चकर लगता है तो उसे संतोष जनक जानकारिय नही मिल पाती है, यह मेरा खुद का अनुभव है, और लोगो से भी सुना है 
तो मेरा मत है की छत्तीसगढ़ में भी कुछ इसी तरह का प्रयास होना चाहिए मार्किटिंग सेल गठित होना चाहिए योजनाओ की गाइड प्रकाशित होनी चाहिए जो की मुफ्त न होकर कुछ कम से कम कीमतों की होनी चाहिए और हर जगह सुलभ होनी चाहिए जिससे सरकारी प्रोजेक्ट पूर्णता सार्वजिनक होने से बहुत से  संपत्ति खरीददारों जो जानकारी के आभाव में इन जगहों पर निवेश से वंचित रहते है उन्हें लाभ पहुचेगा ऐसा मेरा मत है .

Friday, December 24, 2010

मुफ्त के सलाहकार

मेरी सोच यह कहती है की  आज प्रोपर्टी दो लाख रूपये  का पर निवेश करने वाला आपने आप को प्रोपर्टी एक्सपर्ट से कम नहीं समझता है .पान की दुकान हो या सरकारी कार्यालय प्रोपर्टी खरीदने के लिए सलाहकार मुफ्त में मिल जाते है . और यह सलाहकार आप के सहकर्मी -रिश्तेदार-मित्र -जानपहचान वाले -या अनजान कोई भी हो सकते है जो आप को सीपत- लगरा -मोपका - अशोक नगर -कोनी-घुरू अमेरी- सकरी -सिरगिट्टी - तिफरा- बोदरी -परसदा  - बनाक -हरदी बसिया मोड़ -सिलपहरी -धुमा -लाल खदान - जैसे  जगहों पर निवेश के फायदे नुकसान बताने में मुफ्त के सलाहकारों ने कोई कसर नहीं छोड़ी होगी . मैं इन जगहों की बुराई नहीं कर रहा हु इन जगहों पर भी कुछ बहुत ही अच्छे प्रोजेक्ट आवासीय व्यावसायिक आवासीय भूखंडो के प्रोजेक्ट कुछ बिल्डरों के प्रोजेक्ट होउसिंग बोर्ड के प्रोजेक्ट काबिले तारीफ है .परन्तु   इन में से कुछ जगहों पर लोग जो निवेश किये है उन की स्थिति सब के सामने है. प्रोपर्टी पर निवेश किये हुए  किसी को 10 साल किसी  को 5 साल  से अधिक का समय हो गया है .
.सबसे महत्व पूर्ण बात यह है की जो खुद के रहने के लिए प्रोपर्टी खरीदे है उन की हालत सब से खराब है जितने पैसे उन्होंने 10 साल पहने लगाये थे .आज उस की कीमत दुगनी हो गई है पर उसे बेच कर शहर में एक 900 - वर्ग फुट का फ्लेट नहीं ले सकते . मैं यह उदहारण बिलासपुर के प्रोपर्टी मार्केट को ध्यान में रख कर दे रहा हु  मेरी सोच यह कहती है प्रोफेशनल्स की सलाह प्रॉपर्टी आवासीय हो या कॉमर्शियल, अगर उसे खरीदने से पहले किसी प्रोफशनल व्यक्ति या एजेंसी की सलाह ली जाए तो बेहतर होगा . जैसे की निवेश से फायदे नुकसान और आसपास के प्रोजेक्ट की जानकारिया  डिजाइन, एरिया यूटिलाइजेशन  प्रोजेक्ट का अप्रूवल और लीगल पहलुओं  पर विमर्श कर लें. लाखों के सौदे में अगर कुछ हजार रुपये में सही सलाह मिलती है तो भविष्य में होने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है .मुफ्त की सलाह ले लेकिन सलाह को अमलीजामा पहनाने से पहले  प्रोपर्टी एक्सपर्ट या प्रोफेशनल्स की सलाह जरुर ले

Wednesday, December 22, 2010

Bilaspur

छत्तीसगढ़ के जो प्रमुख शहर है उन में प्रथम राजधानी रायपुर और दूसरा न्यायधनी बिलासपुर है.छत्तीसगढ़ का दूसरा बड़ा व्यवसायिक और ओद्योगिक जिला भी बिलासपुर है . बिलासा  दाई के नाम से बसा बिलासपुर इसे  न्यायधनी के नाम सी भी पुकारा जाता है .
मैंने विभिन्न स्रोतों से बिलासपुर जिले और बिलासपुर शहर से जुडी हुई कुछ  महत्वपूर्ण  जानकारियों का संकलन करने का प्रयास किया है. यह  प्रयास बिलासपुर के डेवलपमेंट से जुड़े पहलुओ  को आम लोगो तक पहुचना है . ताकि जो लोग बिलासपुर के बारे में जानना चाहते है उन तक कुछ महत्व पूर्ण जानकारिय पहुच सके आप से निवेदन है की कृपया इसमें दिए गए तथ्य और आकड़ो को एक लेख की तरह पढ़े .


 बिलासपुर जिले की कुल जनसंख्या वर्ष 2001 की स्थिति में 1013875 पुरूष और 984480 महिलाओ  की है .
पुरूषों में साक्षरता 78.4 प्रतिशत और महिलाओं में 48.2 प्रतिशत है .
2001 में  बिलासपुर शहर की जनसंख्या करीब ढाई लाख थी यह शहर 30 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में बसा हुआ है.
कुछ समय पहले 18 ग्राम पंचायतों को निगम में शामिल करने का प्रस्ताव अब तक भी पारित हो चूका है,  इसमें मंगला, कोनी, बिरकोना, खमतराई, बहतराई, बिजौर, लिंगियाडीह, मोपका, देवरीखुर्द, दोमुहानी, महमंद, सिरगिट्टी, बन्नाकडीह, तिफरा, परसदा, घुरू, अमेरी एवं उसलापुर समेत कुल 18 ग्राम पंचायतों को नगर निगम में शामिल करने का आग्रह किया गया था . जिस पर प्रशसनिक स्तर पर कार्य चल रहा है जैसे (दावा आपति व अन्य ) 
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के साथ ही बिलासपुर जिले की अमर विकास  यात्रा शुरू हो गई थी. 


जिले के विकास के 10 वर्षों के सफर पर नजर डालें तो शासन द्वारा 103 भवन, 499.95 किमी गिट्टीकृत मार्ग, 841.63 कि.मी. मार्गों का नवीनीकरण, 436.85 कि.मी. डामरीकृत सड़कों का नवीनीकरण, 823.52 किमी नयी डामर सड़क, 9 मध्यम पुलों और 1033 पुलियों का निर्माण किया गया। दूरस्थ क्षेत्रों में 560 पुल-पुलिया, 146 भवन, 100.30 किमी मिट्टी सड़क तथा 184.50 किमी मुख्य सड़क बनाये गये। पक्की डामरीकृत सड़के 594.82 किमी बनाए गये तथा 264.40 किमी सड़कों का नवीनीकरण किया गया.

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत् छ: वर्षों में २६२ शासन द्वारा सड़कों का निर्माण किया गया . इसके अन्तर्गत कुल 991 किमी लम्बाई की सड़के बनी . निर्मित सड़कों के द्वारा जिले के 578 बसाइटों के लोगों को आवागमन का सीधा लाभ मिला है. गत वर्ष 2006 किमी की 57 सड़के और इस वर्ष 494 किमी की 143 सड़के प्रस्तावित की गई. उक्त सड़कों के निर्माण से 230 बसाहट के लोगों को आवागमन की सुविधा मिलेगा .


जिले में सिंचाई क्षेत्र विस्तार के भरपूर प्रयास चल रहे हैं. विगत छ: वर्षों में सौ छोटी बड़ी योजनाओं की स्वीकृति दी गई. पूर्ण योजनाओं के द्वारा 19 हजार 325 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता निर्मित की गई. वर्तमान में जिले का 35-35 प्रतिशत क्षेत्र सिचिंत है. चल सी परियोजनाओं के पूर्ण होने से 48 प्रतिशत क्षेत्र सिंचित होगा. अभी हाल ही में ही अरपा भैसाझार प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल गई है भैसाझार में  12.5 मीटर उंचा  बैराज बनने की सहमती प्राप्त हो गई है  जैसे बिल्हा और तखतपुर के बहुत से ग्रामो में सिचाई की क्षमता का विकास होगा .


बिलासपुर नगर निगम द्वारा बेरोजगारों के लिए मुख्यमंत्री स्वलंबन योजना के तहत् 101.87 लाख की स्वीकृति से 253 दुकानें निर्मित की गई. 53 स्थानों पर सार्वजनिक सुलभ काम्पलेक्स बनाकर आम आदमी को सुविधा प्रदान की गई है .


शासन द्वारा शहरी निम्न आय वर्ग हेतु वाम्बे आवास, शहरी निर्धन आवास, अटल आवास योजना के तहत डेढ़ हजार आवासों का निर्माण 2 करोड़ की राशि से किया गया है . शहर के मध्य स्थित राजा रघुराज सिंह स्टेडियम को लगभग डेढ़ करोड़ की राशि व्यय कर सुविधा युक्त बनाया गया.


शासन की सरोहर धरोहर योजना के तहत शहर के चार तालाबों के पुनरूत्थान के लिए 118.35 लाख रूपये खर्च किये गये

स्वस्थ सविधाओ की दृष्टी से बिलासपुर में   छ.ग. आर्युविज्ञान संस्थान CIMS मेडिकल कालेज स्थापित है .  
नए जिला चिकित्सालय भवन नर्सिंग प्रशिक्षण केन्द्र भवन, एवं नर्सेस हॉस्टल भवन का निर्माण किया गया है 
सेंदरी (बिलासपुर) में 100 बिस्तर का मनोरोगी चिकित्सालय 512.23 लाख की लागत से निर्मित किया जा रहा है यह प्रदेश का पहला एक मात्र मनोरोगी चिकित्सालय है
बिलासपुर में छत्तीसगढ़ का विश्व स्तरीय अपोलो हास्पिटल स्थापित है. 
तीन मान्यता प्राप्त निजी डेंटल कालेज संचलित है.  
चार इंजीनियरिंग कालेज संचालित है .
जिला खेल परिसर लागत 347.30 लाख रोजगार कार्यालय का सर्व सुविधा युक्त भवन, निर्माण जिले की महत्वपूर्ण उपलब्धी है. इसके अतिरिक्त में बहतराई में अत्याधुनिक स्टेडियम का निर्माण प्रगति पर है. जिसके बन जाने से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं जिले को मिल सकेगी
365 करोड़ की लगता से बिलासपुर में  छत्तीसगढ़ के  पहले सीवरेज प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य चल रहा है . 
छत्तीसगढ़ का पहला पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम  बिलासपुर में विकसित हुआ, प्रशासन के सहयोग से सिटी बस प्रारंभ हो गई है. 
बिलासपुर से 110 किलोमीटर पर छत्तीसगढ़ राज्य की  राजधानी रायपुर है तथा दोनों शहर  रेल और सडक मार्ग से जुड़े हुए है .
बिलासपुर को बी श्रेणी का दर्जा मिल चुका है .
बिलासपुर में छत्तीसगढ़ राज्य का उच्च न्यायालय स्थापित है . ग्राम बोदरी में  नवीन उच्च न्यायालय भवन का निर्माण लगभग 10660.32 लाख रूपये की लागत से बनी यह भवन 61 एकड़ क्षेत्र में स्थित है.
BILASPUR रेलवे जोन SECR ( दक्षिण पूर्वी मध्य रेल्वे जोन ) और जोन का मुख्यालय भी है ,और यह सावधिक आय देने वाला मंडल /जोन भी है 
बिलासपुर का रेल्वे स्टेशन बड़ा और सभी सुविधाओ से संपन है यह से हावड़ा और मुंबई रेल मार्ग जुड़े हुए है तथा दिल्ली और विशाखापटनम, भूवनेस्वेर,अंबिकापुर, कोरबा ,चिरमिरी के लिये रेल सेवाए है  


उसलापुर कटनी की और जाने वाली  रेल गाडियों के लिए  उपनगरीय स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है  जिसका प्रथम चरण पूर्ण हो चुका है.    
छत्तीसगढ़ जा पहला केन्द्रीय विश्व विद्यालय  गुरु घासी दास केन्द्रीय विश्व विद्यालय बिलासपुर  कोनी में स्थित है. 
पंडित सुन्दर लाल शर्मा मुक्त विश्व विद्यालय बिलासपुर कोनी में है. 
डॉ. सी वी रमन विश्व विद्यालय बिलासपुर कोटा  ( करगी रोड )में स्तिथ है .


भारत सरकार की  नव रत्न कम्पनी  साउथ ईस्ट कोलफील्ड  ( SECL ) का मुख्यालय बिलासपुर में है  
NTPC सीपत थर्मल पावर (एशिया का सबसे बड़ा ) थर्मल पावर प्रोजेक्ट बिलासपुर से 16 किलोमीटर  दुर सीपत में है. 
नया हाई टेक  बस स्टैंड  (परसदा ) चंडीगड़  के बाद दूसरा हाई-टेक बस स्टैंड की श्रेणी में है 
छत्तीसगढ़ का पहला ट्राफिक पार्क मोपका ( लगरा )में बना है
अचानकमार टाइगर रिजर्व एरिया बिलासपुर से  65 किलोमीटर दुर है 

कानन पेण्डारी चिड़िया घर जिसे की मिनी जू भी कहा जाता है, वह बिलासपुर (सकरी) में है .
बिलासपुर कोनी में आकर्षक बिलासा ताल बनाया गया है .
यहाँ पर कम्पनी गार्डन दीनदयाल पार्क कोन्हेर गार्डन है .
SECL और निगम के सहयोग में  स्मृति वन में तारा मंडल व साइंस पार्क का निर्माण प्रारंभ है   
अचानकमार अमरकंटक बायोस्फियर एरिया  की बिलासपुर कोटा से चालू हो जाता है  
पर्यटन की दृष्टी से रतनपुरऔर रतनपुर की महामाया देवी का प्रचीन मंदिर , तालागाँव ,मल्हार विश्व प्रसिद्ध है. 
महानगरीय तर्ज पर बने कुछ आलीशान होटल्स व  दर्जनों छोटे व बड़े होटल्स और लाज बिलासपुर में है .
बिलासपुर का ट्रांसपोर्ट नगर सिरगिट्टी में  है.

औद्योगिक एरिया सिरगिट्टी ,तिफरा, सिलपहरी में है जहा पर छोटे और बड़े उद्योग स्थपित है .
प्रमुख उद्योगों में सीमेंट,लोहा,विद्युत,स्पंज आयरन आदि उद्योग संचलित है
बिलासपुर जिले में खनिज में डोलोमाइट यहाँ पर बहुत मात्र में पाया जाता है.
बिलासपुर में व्यापर और उद्योग को बढावा देने के लिए जिला उद्योग संघ बिलासपुर का चार दिवसीय व्यापर मेला प्रसिद्ध है
बिलासपुर  की वाणिज्यिक व्यापर मंडी व्यापर विहार में स्थित है. 
बिलासपुर से ----
बिलासपुर  से जांजगीर चंपा जिला 55 किलोमीटर पर है
बिलासपुर से  अकलतरा की दुरी  40 किलोमीटर है जहा पर लाफार्ज सीमेंट की इकाई है  और वर्धा पावर प्लांट का निर्माण कार्य प्रारंभ है .
बिलासपुर से 100 किलोमीटर की दुरी पर कोरबा और  बिलासपुर से 60 किलोमीटर पर मुगेली  है 
बिलासपुर से करीब 150 किलोमीटर पर रायगढ़ स्थित है .
बिलासपुर से रतनपुर ,कोटा मस्तुरी 20 से 25 किलोमीटर की दुरी पर है और यहाँ आने जाने की 24 धंटे साधन उपलब्ध रहते है .
 कोटा ,अकलतरा ,कोरबा ,रायगढ़ रेल सेवा  से जुड़े हुए है . 


और अन्य उपलब्धिया कुछ ईस प्रकार है
 .
.बिलासपुर के वृहद् विकास के लिए अरपा विशेष क्षेत्र प्राधिकरण का गठन हो गया है , यह योजना अभी प्रारंभिक चरण पर है परन्तु  आने  वाले सालो में अरपा गुजरात के सबरमति नदी पर हो रहे रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट जैसे  लगने लगेगी ऐसा मेरा अनुमान है .
कार्पोरेट कम्पनियों के कदम बिलासपुर में पड़ चुके है चाहे बैंकिंग, फाईनेंस, इंशोरेंस सेक्टर की हो .
बिलासपुर में जल्दी ही दो मल्टीप्लेक्स पलस शोपिंग मोल खुलने वाले है जिनका निर्माण अंतिम चरणों में है.
 प्राय सभी नेशनल और मल्टी नेशनल कम्पनियों के दो पहिया से चार और बड़े कामर्शियल वाहनों के   सर्विस सेंटर रायपुर के बाद बिलासपुर में ही खुले है.
आप को और भी बिलासपुर से जुडी कुछ जानकारिया सरकारी तथा गैर सरकारी वेब साईंडो से मिल जाएगी 
बिलासपुर के रियल स्टेट से जुडी जानकारिय आपको मेरे अन्य लेखो पर मिल जायंगी 











Wednesday, December 1, 2010

commercial space bilaspur

bilaspur कामर्शियल स्पेस की मांग दिन प्रति दिन बड़ते जा रही है आने वाले कुछ महीनो के भीतर बिलासपुर में कामर्शियल स्पेस में की मांग बड़ने वाली है क्योकि मुझे लग रहा है पिछले सात आठ महीनो में जो  व्यापर विहार में जो कार्पोरेट  सेक्टर की एंट्री हुई है उस से आने वाले कुछ दिनों में फिर से व्यापर विहार की कॉमर्शियल प्रॉपर्टी में फिर से पूछ परख बड़ने की सम्भावना दिखने लगी है .उस का एक कारण यह भी है की बस स्टैंड  और हाई कोर्ट का  नया भवन बोदरी में बन जाने और होउसिंग बोर्ड की तथा यहाँ पर एक दो आवासीय  टाउनशिप के बनने और कुछ छोटे और बड़े पैमाने पर वैध और अवैध भूखंडो की बिक्री बड़ने तथा उसलापुर में रेल्वे स्टेशन में यात्री सुविधाओ में विकास होने के  साथ में उसलापुर और सकरी में तीन से चार बड़ी आवासीय  टाउनशिप के बनने से व्यापर विहार अब शहर का केंद्र बन गया है जो कभी बस स्टैंड हुआ करता था .व्यापर विहार से उसलापुर सकरी और बोदरी परसदा  SECL राजकिशोर नगर एक दम पास लगते है. और रास्ता भी सिधा और आसान है, कोई नया व्यक्ति भी आसानी से इन जगहों पर पहुच सकता है.यह कुछ ऐसे समीकरण है जिनसे  मुझे लग रहा है की ये व्यापर विहार  में कामर्शियल स्पेस की मांग को बड़ने वाले है  हालाकि अभी व्यापर  विहार में कामर्शियल स्पेस की मांग कम है,पर मुझे लग रहा है की आने वाले कुछ समय में सभी बड़ी कार्पोरेट  कंपनियों के ऑफिस  या हेड ऑफिस व्यापर विहार में रहेंगे क्योकि  इन कंपनियों के ब्रांच ऑफिस आने वाले समय में  व्यापर के हिसाब से उसलापुर और बोदरी परसदा तोरवा नाका  SECL राजकिशोर नगर (मोपका) इन जगहों  पर खुलेंगी या कुछ इन जगहों पर खुल गए है अब बाकि कंपनिया इसी ट्रेंड को फलो करने वाली है. तो  जाहिर सी बात है की  आने वाले कुछ सालो में  व्यापर विहार बिलासपुर का कामर्शियल और अफिशियल केंद्र बन जायेगा 



सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बात यह है की यहाँ पर प्रॉपर्टी के बुलबुले के फूटने का असर कम हो गया है अब यहाँ का पर की जो प्रॉपर्टी है वो डेवलपमेंट का रूप लेने लगी है श्रीकान्त वर्मा मार्ग पर माल के चलू होने का समय नजदीक आने  की वजह से यहाँ की प्रॉपर्टी पर बहुत जम के उछाल आने की सम्भावना तेज हो गई है अभी डोमिनोस के चालू होने  से ही आसपास की प्रॉपर्टी पर सुगबुगाहट तेज हो गई है और सब से महत्वपूर्ण बात यह है की यहाँ पर अभी कुछ छोटे और बड़े प्रोजेक्ट के लिये लोगो की जमीने बहुत है और मेरा मानना है की जहा पर जमीने ज्यादा होती है वह पर प्रोपर्टी की कीमत और डेवलपमेंट ज्यादा होता है
                                                                                                                   
व्यापर विहार को अब मैं इतना महत्व क्यों दे रहा हु क्योकि कार्पोरेट कंपनिया किसी भी कामर्शियल स्पेस पर 6 से ९ साल  से ज्यादा दिन नहीं टिकती है और अब बिलासपुर में कुछ छोटे और बड़े  कार्पोरेट समूह काफी पुराने हो गये है वे अब अपनी ब्रांच भी खोल रहे है और कुछ  खोलने वाले भी है  और बिलासपुर का सेंटर  व्यापर  का केंद्र व्यापर विहार ही है . अब मुझे लग रहा है की वो समय आने वाला है यहाँ की होल्डिं की हुई प्रोपर्टी को नए और बड़ी हुई कीमत मिलने की उमीद लग रही है जो यहाँ पर आये बूम के जाने के बाद से कुछ ठंडी पड़ी थी,

Saturday, November 13, 2010

मै आपने शहर बिलासपुर से बहुत प्यार करता हु मै भी चाहता हु की मेरा बिलासपुर भी ऐसा ही बने जिस के लिए मै जो प्रयास कर सकता हु करूँगा .वैसे  तो मैं कभी किसे के लेख को कॉपी नहीं करता पर आज अहमदाबाद जिन्दाबाद कहने पर मजबुर होगया हु और मैं ईस लेख के लेखक को भी सलाम करना चाहता हु जिन्होंने इतनी खूबसूरती के साथ यह लेख लिखा है ...मुझे लगा की मैं कही टीवी पर अहमदाबाद की विकास यात्रा पर कोई फिल्म देख रहा हु बहुत सुंदर लेख ....
 जब हिरोशिमा और नागासाकी में बम गिरा था उस के  बाद  वहा के लोग और वह के प्रशासन से जो विकास किया.वो काबिले तारीफ है . आज जापान की तरक्की सब के सामने है ईस लेख से मुझे जापानियों की मजबूती और विस्वास और काम के प्रति समर्पण की बाते जो मैंने पढ़ी है वो  याद आती है ! ऐसा ही कुछ गुजरात के लोगे ने किया है ...अहमदाबाद जिन्दाबाद ..अहमदाबाद के लोग जिन्दाबाद....अहमदाबाद का प्रशासन जिन्दाबाद  और गुजरात की सरकार जिन्दाबाद 

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 बात वर्ष 2000 की है। आईआईएम-ए ने ‘अहमदाबाद ए डाइंग सिटी ऑफ ट्वेंटी फस्र्ट सेंच्युरी’ नाम से केस स्टडी तैयार की थी। संभवत: इसका आधार पूरब का मैनचेस्टर कहे जाने वाले अहमदाबाद के सितारों का गर्दिश में होना था। कारण, तब गुजरात के इस मुख्य शहर का वैभव धीरे-धीरे ख़त्म हो रहा था। 

मिलों की चिमनियां जमींदोज हो चुकी थीं, अधिकांश मिलें वित्तीय संकट की गिरफ्त में फंसी थीं, यानी शहर की रीढ़ कही जाने वाली टैक्सटाइल्स व मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री की इमारत ताश के महल की भांति जमीन पर आ गिरी थी। 

‘ग़रीबी में आटा गीला’ वाली कहावत की तर्ज पर जनवरी 2001 में आए विनाशकारी भूकंप ने अहमदाबाद की हालत और खस्ता कर दी। बड़े पैमाने पर जानमाल का नुक़सान हुआ। अनेक इमारतें ध्वस्त हो गईं। रियल एस्टेट सेक्टर में फ्लैट के भाव टूट कर निचले स्तर पर आ गए। 

अहमदाबाद के विभिन्न इलाक़ों में जमीनों के भाव बढ़े, लेकिन बंगला और सोसायटी बनाने हेतु पर्याप्त बुनियादी संरचना नहीं थी। भूकंप के बाद के झटके शहर की जिजीविषा की कठिन परीक्षा ले ही रहे थे कि गोधरा कांड हो गया। अहमदाबाद में 21वीं सदी के सबसे भयंकर सांप्रदायिक दंगे भड़क गए। 

अहमदाबाद हिंदू-मुस्लिम की स्पष्ट और गहरी खाई में विभाजित हो गया। अहमदाबाद की यह हालत क्या आईआईएम द्वारा दी गई ‘मरते शहर’ की उपमा को सही साबित नहीं करती कि राज्य का यह मुख्य शहर अपने अस्तित्व के ख़ात्मे की ओर बढ़ रहा था? दरअसल, 2002 में अहमदाबाद की अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगा था। बेरोÊागारी चरम पर पहुंच गई थी। मुंबई-दिल्ली एवं कोलकाता के बाद अहमदाबाद भारत का सबसे बड़ा प्रदूषित शहर था। 

अकल्पनीय कायाकल्प!

हालांकि अब सबकुछ बदल चुका है और अहमदाबाद विश्व में तीसरा तथा भारत का सबसे तेजी से विकसित हो रहा शहर बन गया है। सवाल उठना लाजिमी है कि पिछले साढ़े सात वर्ष में ऐसा क्या हुआ कि आज अहमदाबाद प्रतिष्ठित फोब्र्स पत्रिका की दृष्टि में विश्व का तीसरा और भारत का पहले नंबर का ‘फास्टेस्ट ग्रोइंग सिटी’ बन गया है। 

आने वाले दशक के पॉवर हाउस के रूप में चिन्हित 20 शहरों में भारत के अन्य दो शहर चेन्नई व बेंगलुरु क्रमश: 10 व 15वें पायदान पर हैं। फोब्र्स की रिपोर्ट कहती है कि अहमदाबाद की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से दो गुना है। अहमदाबाद का बीते साढ़े सात सात में पूरी तरह कायाकल्प हो गया है। 

गुजरात को भारत का डायनैमिक एवं मार्केट-फ्रेंडली राज्य क़रार देते हुए फोब्र्स पत्रिका कहती है कि विकासपरक सरकार ने मृतप्राय: अवस्था में पहुंची टैक्सटाइल्स सिटी को डायमंड, फॉर्मास्यूटिकल्स, कैमिकल्स एवं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का अंतरराष्ट्रीय बिजनेस हब बना दिया है। 

सबकुछ चकाचक

अहमदाबाद को यह रुतबा केवल आर्थिक प्रगति पर आधारित नहीं, बल्कि वैश्वीकरण एवं उदारीकरण के परिप्रेक्ष्य में रोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा नागरिकों को सुख-समृद्धि देने के लिए किए गए कार्यो के चलते मिला है। आज इसके पास श्रेष्ठतम कारोबारी बुनियादी संरचना है। 

शहर सबसे अधिक आयकर चुकाता है। संपदा-निर्माण में यह पहले पायदान पर है। स्टॉक मार्केट में मुंबई के बाद सर्वाधिक निवेश अहमदाबाद करता है। ‘लाइफ़ ऑफ्टर वर्क’ एवं ‘लाइफ़ एट वर्क’, इन दोनों इंडेक्स में अहमदाबाद पहले क्रम पर काबिज है। क्लब, कल्चर एवं मल्टीप्लेक्स की भरमार वाले अहमदाबाद में जीवन का ख़र्च मेट्रो और मेगासिटी की तुलना में सस्ता है। 

अहमदाबाद में अंतिम चार साल में कोई महामारी सिर नहीं उठा सकी। फलत: यह भारत में मेडिकल टूरिÊम हब के रूप में उभरा है, वैश्विक स्तर के हॉस्पिटल एवं फाइव स्टार होटल्स का रुख इसकी ओर है। शहर और इसके समीपवर्ती इलाक़ों में रियल एस्टेट बूम पर है। 

खुली जमीन व मकान आदि के भाव में बंपर उछाल है। पश्चिम बंगाल में सिंगूर विवाद के चलते प्रख्यात उद्यमी रतन टाटा की लखटकिया कार नैनो की सवारी साणंद लाने से बड़ी संख्या में बहुराष्ट्रीय कंपनियां (एमएनसी) अपने बिÊानेस सेंटर और कॉपरेरेट अहमदाबाद में स्थापित कर रही हैं। 

मायानगरी मुंबई की तुलना में लक्जरी कार बीएमडब्ल्यू व मर्सिडीज की बिक्री अहमदाबाद में अधिक है। नैनो से लेकर जनरल मोटर्स (जीएम) तक कार निर्माता अहमदाबाद व शहर के आसपास विकसित हो रहे ऑटोमोबाइल रीजन में निवेश कर रहे हैं। 

अदानी से लेकर अंबानी के लिए अहमदाबाद ‘होम पिच’ है, लेकिन एयरबस व बोइंग सरीखी कंपनियां भी इसके पास बनने वाले नए अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के समीप अपने सर्विस सेंटर खोलने की तैयारी में हैं। दुनिया के श्रेष्ठ विश्वविद्यालय और हॉस्पिटल समूह अपनी इकाइयां अहमदाबाद में खोलने के लिए आतुर हैं, लाइन में लगे हैं। 

कैसे हुआ यह

अहमदाबाद का कायाकल्प अनवरत और योजनाबद्घ रणनीति से आगे बढ़ने का परिणाम है। इसमें स्थानीय लोगों से लेकर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी तक, सभी ने हर संभव परिश्रम करते हुए अपना-अपना रचनात्मक योगदान दिया है। ‘मरते शहर’ से कोई शहर जिंदादिल-जोशीला कैसे बन सकता है, यह भी एक क़ाबिले तारीफ़ केस स्टडी है। 

शहर की स्थापना की पृष्ठभूमि पर सरसरी नजार डालने से पता चलेगा कि अहमदाबाद की तासीर ही है कि यह किन्ही भी हालात से हार नहीं मानता। 600 साल पहले तत्कालीन बादशाह अहमद शाह साबरमती नदी के किनारे से गुजर रहे थे। उनके घोड़े के आगे शिकारी कुत्ते दौड़ रहे थे, तभी एक खरगोश नजर आया। 

शिकारी कुत्तों ने झपट कर खरगोश को निशाना बनाना चाहा, लेकिन जो हुआ उसे देख कर बादशाह हैरत में पड़ गए, क्योंकि शिकारी कुत्तों को सामने देख खरगोश ने दुम नहीं दबाई और न ही डरा, बल्कि कुत्तों के आगे अड़ गया! इस घटना से गहरे तक प्रभावित बादशाह ने साबरमती के रेत से भरे तट पर शहर बसाने का हुक्म सुना दिया। 

इस घटना को छह सदी का लंबा व़क्त बीत गया है, लेकिन यही इस शहर के जÊबे की कहानी का सूत्र है। अब यही साबरमती तट पर बसा अहमदाबाद शहर अपने अति-महत्वाकांक्षी रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट व स्काईलाइन की दम पर सिंगापुर व मलेशिया से मुकाबला करना चाहता है। 

वर्ष 2000 में नए अहमदाबाद की रूपरेखा अंगूठी (रिंग) के आकार की बनी। 2005 में अहमदाबाद महानगर पालिका (मनपा) की तिजोरी में 260 करोड़ का फंड था तथा 200 करोड़ रुपए विकास कार्यो पर ख़र्च किए जा चुके थे। अब 2010 में यही अहमदाबाद इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 10,000 करोड़ रुपए ख़र्च कर रहा है। परिणाम भी सामने है। अंतिम साढ़े चार साल में शहर में डेढ़ लाख करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट हुआ है। 

योजनाबद्ध विकास 

अहमदाबाद के विकास के लिए सक्र्युलर ग्रोथ प्लान तैयार किया गया है। बेहतरीन प्रशासन एवं श्रेष्ठ इंफ्रास्ट्रक्चर सुनिश्चित करने के लिए शहर से 466 वर्ग किलोमीटर की परिधि में आने वाली 30 ग्राम पंचायतों एवं 20 नगर पालिकाओं का राज्य सरकार ने अहमदाबाद मनपा क्षेत्र में विलय कर दिया। 

इससे सभी सत्ता केंद्र एक स्थान पर केंद्रित हो गए। समूचे शहर के विकास के लिए एक विÊान डॉक्युमेंट तैयार किया गया। प्रगति का ब्लूप्रिंट विशेषज्ञों की सहायता से तैयार किया गया। इसमें भविष्य के अहमदाबाद की जनसंख्या और उसके मुताबिक़ जलप्रदाय, ड्रेनेज, स्टॉर्म वॉटर, परिवहन, स्वास्थ्य, सैनिटेशन एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत आदि बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। 

टाउन प्लानिंग स्कीम में पारदर्शिता रखी गई। अहमदाबाद को मेट्रोसिटी बनाने का संकल्प व्यक्त किया गया। राज्य सरकार ने शहरी एजेंडे में विकास का पूरा रोडमेप बनाया। योजना, नीतियों के सटीक क्रियान्वयन की रूपरेखा भी इसी में स्पष्ट की गई। 

इस ब्लूप्रिंट का फल यह हुआ कि केंद्र सरकार के जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन मिशन (जेएनएनयूआरएम) में सबसे अधिक प्रस्ताव अहमदाबाद ने समय पर पेश किए, जिससे 10 हजार करोड़ रुपए का अनुदान मिला। फलत: बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस), रिवरफ्रंट डेवलपमेंट, कांकरिया लेक सौंदर्यीकरण, दो रिवरब्रिज, तीन अंडरपास तथा 16 फ्लॉईओवर ब्रिज तीन साल में बन गए। 100 टाउन प्लानिंग स्कीम का क्रियान्वयन हुआ। 

सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्घि की दृष्टि से अहमदाबाद मनपा ने एक नए डेंटल कॉलेज की शुरुआत की। शहर की लगभग 60 लाख की जनसंख्या के लिए 100 वॉटरसप्लाई व ड्रेनेज की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। अहमदाबाद 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति करने वाला देश का पहला शहर है।

साबित किया ख़ुद को 

यहां शासन-प्रशासन स्तर पर नई पहल के रूप में ई-गर्वनेंस, ई-बिलिंग, ई-पेमेंट सुविधा शुरू की जा चुकी है। वित्त, प्रबंधन के स्तर पर काम पूरी सतर्कता के साथ किया जा रहा है। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए थर्ड-पार्टी इंस्पेक्शन व्यवस्था खुले दिल से अपनाई गई है। 

आईआईएम एवं ऑर्किटेक्ट स्कूल के विशेषज्ञों की मदद से अच्छे तकनीकी व प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति की गई। झुग्गी बस्तियों पर नÊार रखने व पुनर्वास का काम बिना किसी विवाद-विघ्न के पूर्ण हुआ। शहर नियोजन स्कीम हेतु भूमि अधिग्रहण के दौरान भी किसी प्रकार की कानूनी अड़चन पेश नहीं आई। 

पर्यावरण संरक्षण-संवर्धन के प्रति जागरूकता रखते हुए सीएनजी-चलित रिक्शे-बस एवं टैक्सियां शुरू की गईं। लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सड़क के दोनों ओर पक्की पगडंडिया बनाई गई हैं, जिससे पार्किग की समस्या को नियंत्रित करने में सफलता मिली। 

संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ क्योटो प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने वाला अहमदाबाद अब स्वच्छ ऊर्जा, हरित भवन की तरफ़ तेÊाी से बढ़ रहा है। अहमदाबाद अब दिल्ली-मुंबई डेडिकेटिड इंटीग्रेटिड कॉरिडोर (डीएमआईसी) व पोर्ट इकॉनिमी संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए सर्विस सेक्टर से लेकर कनेक्टिविटी के नए लक्ष्य को पूरा करने में लगा है। 

डीएमआईसी का लगभग 37 प्रतिशत हिस्सा गुजरात में पड़ता है। डीएमआईसी के राज्य के जिन इलाकों से गुÊार रहा है, उनके आसपास 52 स्पेशल इकॉनोमिक जोन (सेज) एवं छह स्पेशल इकॉनोमिक रीजन (सर) विकसित हो रहे हैं। 

इसी तरह गुजरात 1608 किलोमीटर लंबे समुद्रतट से समृद्ध राज्य है। तटक्षेत्र में छोटे-बड़े 46 बंदरगाह हैं, जिनका ट्रैफिक व व्यापार अहमदाबाद होते हुए होगा। ये दोनों क्षेत्र ही अहमदाबाद का विकास इंजन बनने वाले हैं और अगले दशक में गुजरात को भी पहले नंबर पर आरूढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। - (लेखक दिव्य भास्कर गुजरात के स्टेट एडीटर हैं

Thursday, November 11, 2010

कमल विहार

कमल विहार पर जो अभी विवाद आया है .. उस की कुछ शासकीय तकनिकी या विभागों के तालमेल में कुछ एक बिन्दुओ  पर तकनीकी खामियों की वजह से मिडिया में जो खबरे आरही है ... इस का समाधान तो जल्दी हो जायेगा मुझे ऐसा लगता है .
पर  मुद्दा ये है की किसान इस का विरोध क्योकर रहे है . जब की जिन लोगो की जमीन कमल विहार में आई है उन को उन की जमीनों की कीमत बहुत ज्यादा मिले है . अब तो खबरे ऐसे आई है की कमल विहार से जो भी लाभ प्राप्त होगा उस को भू - स्वामियों को बाट दिया जायेगा .. यह सच में कुछ ऐसा है तो अच्छी खबर है. 

यदि यह एक कारपोरेट प्रोजेक्ट रहता तो किसान ख़ुशी ख़ुशी आपनी जमीने दे देते क्योकि बाकी की जमीने कम्पनी मनमाने दामो पर खरीद लेती .सरकारी एक रेट फिक्स है बस तकलीफ यहाँ से आना चालू हो गई है की अब आसपास की जमीनों के भाव सरकारी कीमत से दस गुना ज्यादा हो गए है . इस लिए किसान अब विरोध करना चालू कर रहे है .इस में किसान कम और जमीन पर निवेश करने  वाले ज्यादा होंगे.

राजस्व विभाग का कुछ क़ानूनी  मसला तो आपने समझ से परे है !जो जल्दी ही हल हो  जायेगा हम तो यही आशा कर रहे है .
मुझे लगता है , की कमल विहार  की योजना में  जो विवाद है हो रहा है , उस का हल इसी विवाद में ही है .
RDA को ईस कमल विहार योजना के लिए प्रोपर्टी सेक्टर के सलाहकारों से भी सलाह लेनी चाहिए .
कुछ लोगो  से ईस बारे में सुझाव लेने चाहिए .
कुछ नए सलाहकार नियुक्त करना  चहिये 
और भी कुछ बाते है जो लिखी नहीं जा सकती पर समझदारो के द्वारा  सुलझाई जा सकती है ..


(  मै यह लेख जो लिखा है यह मेरी सोच है जो एक छोटी से कहानी की तरह है कृपया इसे वास्तविकता में न )

Wednesday, November 10, 2010

बिलासपुर वासियों के लिए एक खुशखबरी एक तकनीकी सुचना के अनुसार वर्तमान में शहर में प्रति दिन 35 MLD पानी की पूर्ति हो रही है और 30 सालो के बाद बिलासपुर शहर को प्रति दिन 75 से 80 MLD पीने के पानी के जरुरत होगी !

और इतने अधिक पीने के पानी के लिए कम से कम २०० करोड़ से भी ज्यादा का खर्च होगा .और साथ में तकलीफे भी बहुत होंगी...पर हमारी किस्मत अच्छी है की हमारे बिलासपुर से शहर के बिच से से अरपा नदी निकलती है , बिलासपुर के लोगो की किस्मत और भी अच्छी है की हमारे मंत्री जी आपने विदेश दौर का सही उपयोग किया जो लन्दन की टेम्स नदी को देख कर नही आये बल्कि टेम्स नदी को बिलासपुर लाने का सपना भी देख कर आये और अरपा को टेम्स नदी जैसा बनाने के प्रयास में लगे रहे ! जिसका परिणाम अरपा को सवारने के लिए आज अरपा विशेष क्षेत्र प्राधिकरण का गठन हमारे सामने है,श्री अमर अग्रवाल जी ने एक आर्किटेक्ट सोच रखते हुए बिलासपुर में अरपा प्रोजेक्ट को सामने लाया !यह सपने को सच करने जैसा ही है !




बिलासपुर में पर्यटन को बढाने के लिए अरपा प्रोजेक्ट में मनोरंजन के साधनों , मनोरंजन से जुडी योजनाओ का समावेश करके दुगुना किया जा सकता है !अच्नाकमार टाइगर प्रोजेक्ट , पोराणिक धरोहरे , छत्तीसगढ़ का दूसरा बड़ा व्यवसायिक और ओद्योगिक जिला, शहर सब तो है यहाँ .

मैं अरपा प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा समर्थक हु करण तो बहुत से है जिनके बारे मे बाद में चर्चा करूँगा .....
###....मनीष जयसवाल....###

 

Wednesday, November 3, 2010

अरपा विशेष क्षेत्र प्राधिकरण

इस से पहले भी मै अरपा पर ब्लॉग लिख चूका हु चुकी अवसर कुछ ऐसा है जो मैं आपने आप को रोक नहीं पा रहा हु करण यह है की  अरपा विशेष क्षेत्र प्राधिकरण के गठन होना मैंने कई बार इस अरपा प्रोजेक्ट पर कई लोगो से चर्चा की है और यह मेरे लिए भी एक सपने को सच होते देखने जैसा है इस प्रोजेक्ट को को लेकर जो जो बाते मैंने सोची थी वो भी समय के साथ हकीकत में बदलती नज़र आ रही है .. यह प्रोजेक्ट चलू होने से मुझे यह फायदा मिला है की मैंने जिन जिन लोगो के सामने इस प्रोजेक्ट से जुडी बाते कही थी वो सच होते जा रही है


                                              मुझे लगता है की अरपा प्रोजेक्ट कुछ ऐसा ही होगा
                                                 २०२० में कुछ ऐसा लगे गी अरपा नदी  
                                                   अरपा नदी २०२२ में
                                                     Arpa ka kinara 2021 me kuch aisa hoga
                                                        Arpa Bilaspur २०१९ में कुछ इस तरह लगेगी 
                                                 सेंदरी या लोफंदी या फिर घुटकू  में  में कुछ ऐसा नजरो होगा 
                                                 !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
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""सपने सच नहीं होते'' ...पर अमर अगरवाल जी ने सपनों को सच करते हुए यह साबित कर दिया ..( अरपा प्रोजेक्ट) अरपा विशेष क्षेत्र प्राधिकरण के गठन की अधिसूचना जारी होने पर हार्दिक बधाइयाँ...

बिलासपुर का अरपा प्रोजेक्ट मंत्री और विधायक श्री अमर अग्रवाल जी का ड्रीम प्रोजेक्ट है , बिना अग्रवाल जी की सोच के आज अरपा प्रोजेक्ट अस्तित्व में नही आता , अरपा विशेष क्षेत्र प्राधिकरण के गठन की अधिसूचना जारी हो गई है कुछ दिनों में यह राजपत्र में भी प्रकाशित हो जाएगी , इससे बिलासपुर में अरपा प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल गई ... अब बिलासपुर की अरपा नदी भी आने वाले समय में लन्दन की टेम्स नदी जैसा दिखने लगेगी और जैसा विकास लन्दन की टेम्स नदी का हुआ है वैसा विकास बिलासपुर में अरपा का भी होगा ...

यह योजना बिलासपुर के विकास को नयी दिशा देने वाली है , हमें बिलासपुर के विकास के लिए 500 करोड़ से ज्यादा का एक प्रोजेक्ट विधायक और प्रभारी मंत्री श्री अमर अगरवाल जी से मिला है इस को कहते है उमीद से एक हजार गुना अधिक मिलना .........................यह उनकी सोच का परिणाम है एक नए- नए राज्य के गठन के बाद असम्भव सी लगने वाली सोच को श्री अमर अग्रवाल जी ने कागजो में उतारा फिर कागजो से निकल कर उस को अस्तित्व लाया जो आज अरपा विशेष क्षेत्र प्राधिकरण बिलासपुर के रूप में हमारे सामने आ रही है !

Saturday, August 7, 2010

bilaspur real estate market

bilaspur real estate market 
जैसे जैसे नए कीर्तिमान रचता जा वैसे ही उसके दुष्परिणाम  सामने आते जा रहे है जिनसे निपटने के लिए प्रशसन को भी दिकते आने वाली है , मसलन जैसे की ट्राफिक की समस्या पोलिस थानों पर  बढता हुआ दबाव और भी बहुत से  दुष्परिणाम  है पर मैं अभी इन दो प्रमुख समस्या को लेकर यहाँ के real estate market पर यह समस्याए क्या प्रभाव डाल सकती है उस पर प्रकाश डालने का प्रयास कर रहा हु
            ट्राफिक की समस्या पूरे विश्व के  हर बड़ते हुए नगर, महानगर,  कसबे, की है .पर इस समस्या से निपटने के लिए पूरे विश्व के  हर बड़ते हुए नगर, महानगरो में कुछ कड़े कानून और नियम बनाये गए है . कानून और नियम हमारे यहाँ पर भी है. पर इन  कानून और नियम का पालन  न करने की कुछ लोगो ने कसम खाई हुई है जिस की परिणाम स्वरूप दुरधटनाओ को यह लोग निमंत्रण देते है जिस करण  दुरधटनाओ का ग्राफ बढता ही जा रहा है 
 ट्राफिक की समस्या के करण यहाँ के  real estate market पर भी पड़ा है जैसे की लोग अब सदर बाजार जाना ज्यादा पसंद नहीं करते है क्योकि वह पाकिंग की सबसे बड़ी समस्या है ट्राफिक  रेंग -रेंग कर चलता है जिसके परिणाम स्वरूप यहाँ का व्यापर बस स्टैंड और तेली परा जैसे नए मार्केट से पिछड़ गया है, मेरा मानना है की बिलासपुर के ज्यादा तर लोग की सोच आज यह होती जा रही है की जहा उनकी गाड़ी पार्क होती है वो उस से ज्यादा दुर जा कर मार्केटिंग  करना पसंद नहीं करते एक उदारण के लिए बस स्टैंड और तेलीपारा की सफलता सामने है .टू व्हीलर हो या फोर व्हीलर की संख्या दिन प्रति दिन बड़ते ही जा रही  है और शहर की  सड़के थोड़ी बहुत बड़ी है उस के ऊपर यहाँ पर पार्किंग की कोई ठीक व्यवस्था भी नहीं है और लोग सही पार्किंग के लिए जागरूक भी नहीं है , और यहाँ का प्रशासन भी  पार्किंग जैसी समस्या के लिए जागरूकता जैसा कोई कदम  भी नहीं उठता . बस वाहन चेकिंग और पार्किंग के लिए छोटे मोटे चालान और मिडिया जब इन्हें सोते से जगाती है तब पेट्रोलिंग कर के थोड़ी बहुत व्यवस्था सम्भाल लेते  है 
वाहन चेकिंग और पार्किंग के लिए छोटे मोटे चालान से कुछ नहीं होगा सबसे महत्वपूर्ण है लोगो में जागरूकता लाना , जिसकी और प्रयास हुए है जैसे सडक सुरक्षा सप्ताह जो साल में एक बार काफी नहीं है , छत्तीसगढ़ का पहला ट्राफिक पार्क बिलासपुर में ही बना है उस का लाभ  आने वाले समय में लोगो को मिलेगा पर बिलासपुर में ऐसे प्रयासों से ट्राफिक की समस्या हल नही होने वाली अभी से आने वाले समय के लिए पार्किंग की जगह छोडनी होगी या फिर बहुमाज़िले पार्किंग स्पेस का निर्माण करना चाहिए , सड़के ज्यादा बड़ी हो इस लिए टाउन एंड कंट्री प्लान में कुछ नियमो का सकती से पालन करना होगा ,नए मास्टर प्लान के अनुसार  पार्किंग स्पेस पर विशेष ध्यान देना होगा नहीं तो आने वाला समय में जो हाल अभी गोलबाजार जुना बिलासपुर सदर बाजार का है वो करीब पूरे शहर के ज्यादातर प्रमुख मार्गो का होगा ,आने वाले समय में  बिलासपुर के real estate market पर प्रभाव यह होगा की वर्तमान बिलासपुर शहर  पुराना बिलासपुर शहर  हो जायेगा और नया शहर बोदरी, तिफरा ,सकरी कोनी मोपका हो तब जो आज कीमत यहाँ शहर में है क्या आने वाले सालो में आज से चार गुना अधिक कीमतों में लोग पुराने बिलासपुर में खरीदना पसंद करेंगे . आज सराफा मार्केट  यदि गोलबाजार से कही और चल दे तो क्या कोई भी वह पर 4000 रूपये वर्ग फुट में कोई दुकान या ज़मीन लेना पसंद करेगा .....अब यह सवाल सामने है ......
BIlaspur real estate market पर ट्राफिक की समस्या हावी होने वाली है वर्तमान में तो यही लग रहा है

Wednesday, July 14, 2010

मेरा अनुमान

बिलासपुर  प्रॉपर्टी मार्केट के बारे में मैंने कुछ बाते लिखी थी मेरा अनुमान था की मार्केट की दिसंबर से अपनी रफ़्तार पकड़ेगा और कुछ ऐसा ही हुआ मार्च के अंत तक खास कर होउसिंग  सेक्टर पर यह ठीक रहा ! होउसिंग सेक्टर ठीक रहने का एक बड़ा करण होम लोन पर ब्याज दरें कम थी और कुछ कम्पनियों ने बहुत से स्कीम  लेकर आई थी जिस का बहुत से लोगो  ने फायदा उठाया है ! अप्रेल से जून तक भी प्रोपर्टी की कीमतों में बढोतरी जरी थी .. इस मार्केट की खासियत यह है की हर महीने 10 से 15 रूपये वर्ग फुट कीमते आपने आप बढ जाती है , कभी भारतीय नगर में 150 रूपये में प्लाट मिलजाता था अब वो ( पिछले 8 सालो में ) अब 450 से  500  रूपये वर्ग फुट होगया है , वो भी 8 से 10 सालो में .जबकि  वह ज्यादातर प्लाट अवैध कालोनी में आते है कही कही तो 5 से 8 फुट की सकरी गलिय है . गार्डन  और पार्क के नाम पर BDA का लगा हुआ दीनदयाल उद्यान है i यह तो हाल है और ऐसा कुछ आने वाले सालो में रायपुर रोड का होने वाला है तिफरा से बोदरी तक होने वाला है.
  वर्तमान में होम लोन पर ब्याज दरें कुछ बढ़ गई है !  इस बिच बिलासपुर प्रॉपर्टी मार्केट में कुछ बड़े आवासीय प्रोजेक्ट भी आये जिसमे   छोटे बड़े बहुत से प्रोजेक्ट पर लोगो ने निवेश किया ! मेरा अनुमान है की लोगो का  स्वतंत्र  आवासीय परिसर के लिए  रुझान उसलापुर, मंगला रोड और रायपुर रोड की तरफ ज्यादा था ! कमर्शियल प्रोपर्टी पर भी निवेश बहुत शानदार रहा है खास कर आफिस स्पेस पर. आज बिलासपुर में आफिस स्पेस का किराया  25 / से 45 / रूपये प्रति वर्ग फुट  के बिच चल रहा है यही कारण लोगो का  आफिस की ओर निवेश के प्रति रुझान के आकर्षण का कारण है . जो ज्यादा लम्बे समय तक चलने वाला है वतमान में मुझे लगता है की अभी रायपुर रोड उसलापुर और सीपत रोड पर अभी आफिस स्पेस पर निवेश करने का ठीक समय है ऐसा मुझे लग रहा है . (इस ब्लॉग में लिखे हुए विचार मेरे है आप प्रोपर्टी पर निवेश करने से पहले किसी प्रोपर्टी एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लेले )

Tuesday, July 13, 2010

मैं कमल विहार का बहुत बड़ा समर्थक हूँ  पर मुझे RDA का मार्कटिंग का तरीका कुछ नहीं समझ में आता आज बिलासपुर के बहुत से लोग कमल विहार और RDA की योजनाओ में निवेश करना चाहते है पर उन्हें सही मार्गदर्शन न मिल पाना और ज्यादा प्रचार प्रसार नहीं हो पाने के कारण बिलासपुर कोरबा कोरिया जिले के जरुरत मंद लोग RDA की बहुत सी योजनाओ से वंचित है मुझे लगता है की इस को थोडा सा कार्पोरेट स्तर पर ले जाने की जरुरत है. जैसा की बड़ी इस से राज्य सरकार को भी एक बड़ा हिस्सा राजस्व के रूप में प्राप्त हो कार्पोरेट रियल स्टेट कम्पनिया अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए करती है . होउसिंग बोर्ड  , विकास प्रधिकरण  यह केवल सरकारी सुविधा देने वाले संस्थान न बने. इस से राज्य सरकार  को भी अधिक से अधिक राजस्व प्राप्त हो ...थोडा समय के साथ  चलना होगा ....यह हो सकता है इस के लिए  रियल स्टेट  मार्केट से जुड़े लोगो की सेवाए ली  जाये ....
. होउसिंग बोर्ड  , विकास प्रधिकरण में कुछ नया पण लाने का समय आ गया है

Monday, June 28, 2010

Mani Bhai

बहुत दिनों से मैंने कोई ब्लॉग नहीं लिखा है . कुछ समय का आभाव है और यहाँ के प्रोपर्टी मार्केट पर कुछ नयी चीजे मुझे सिखने को मिली इस लिए मैं ब्लॉग नहीं लिख पाया हु पर बहुत जल्दी कुछ लिखने का प्रयास करूंगा

Tuesday, March 30, 2010

निवेश प्रॉपर्टी में

हर कोई चाहता है की उन का पैसा सही जगह पर निवेश हो  पर क्या सच में ऐसा हो पता है कुछ हद तक यह नहीं हो पता . आज प्रोपर्टी पर निवेश भी कुछ ऐसा ही हो गया है! ऐतिहासिक रूप से देखें, तो प्रॉपर्टी में निवेश कम जोखिम वाला विकल्प है, जो लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न देता है  आम तौर पर प्रॉपर्टी बाजार में कीमतों में कम उठापटक देखने को मिलती है ! लोगो की  आर्थिक हालात में सुधार के साथ प्रॉपर्टी मार्केट में डिमांड  भी बड़ी है ! प्रॉपर्टी में निवेश छोटी अवधि में रेंटल से होने वाली आमदनी देता है, जबकि लंबी मियाद में कैपिटल गेन के रूप में फायदा मिलता है ! प्रॉपर्टी में निवेश लंबी अवधि में संपत्ति जुटाने की योजना में काफी फायदेमंद साबित होता है!
प्रॉपर्टी  कैसी  हो और कहा की लोकेशन हो , और उसकी कीमत कितनी हो, और आने वाले सालो में कितनी हो सकती है !  तीन ऐसे महत्वपूर्ण कारण हैं, जो प्रॉपर्टी इनवेस्टमेंट से मिलने वाला रिटर्न तय करने में अहम भूमिका अदा करते हैं ! प्रॉपर्टी निवेश ऐसा क्षेत्र है!  जो आने वाले वक्त में बढ़िया मुनाफा देने का कूबत  रखता है !

आवासीय प्रॉपर्टी
जिन निवेशकों के पास अपने रहने के लिए मकान नहीं है ! उन्हें अपने रहने के लिए प्रॉपर्टी खरीदने के बारे में विचार करना चाहिए ! क्योकि अभी प्रॉपर्टी के कीमते आने वाले 5 से  6 सालो के मुकाबले बहुत कम है ! और साथ में निर्माण की लागत भी अभी कम है ! आने वाले समय में ये 10 से 20 गुना ज्यादा होगी तो निवेशको  को इस ओर ध्यान  देना  चहिये.  और अभी  सरकार भी  हाउसिंग लोन के ब्याज  के पर  आयकर  में छूट देती है !

आवासीय प्लाट 
जिन निवेशको को अभी मकान नहीं बनवाना है ! या प्रॉपर्टी पर निवेश करना है ! या फिर मकान बनवाने के बजट की कमी है वो लोग   आवासीय प्लाट पर निवेश कर सकते है ! इस में भी निवेशको को 30  से 40 फीसदी रिटर्न या आने वाले 5  से 6  सालो में आवासीय प्लाट की कीमत ज्यादा होगी पर आवासीय प्लाट पर निवेश करते समय अवैध कालोनियों पर ना ले या देख परख कर ही ख़रीदे !

कमर्शियल प्रॉपर्टी
कमर्शियल प्रॉपर्टी उन लोगों के लिए बढ़िया निवेश माध्यम हो सकता है  ! जो ज्यादा रेंटल वैल्यू पर निगाह टिकाए हुए हैं, और ज्यादा बड़ी  अवधि में कैपिटल में इजाफा देखना चाहते हैं ! कमर्शियल प्रॉपर्टी की कीमत  हर जगह अलग अलग होती है ! आवासीय प्रॉपर्टी से ज्यादा महगी भी हो सकती  है ! यह लोकेशन  पर निर्भर करता है ! वैसे  प्राइम लोकेशन पर कमर्शियल प्रॉपर्टी कुल रेंटल आमदनी में 10से 20 फीसदी रिटर्न हासिल कर सकती है ! पर कमर्शियल प्रॉपर्टी लेने से पहले लोकेशन ओर रेंटल वैल्यू क्या है !  ओर क्या हो सकती है, यह सोच कर ही निवेश करे !

Thursday, March 11, 2010

neno house ki shuruwat raipur se

मैं नेनो हाउस का हमेश समर्थन करता हु . रायपुर में जो कमल विहार की आवासीय कालोनी बन रही है उस में भी नेनो हाउस अपार्टमेन्ट  को शामिल किया गया है ४१७ वर्ग फुट के सुपर बिल्ट  एरिया की कीमत २.४५ लाख है जिसमे की सश्कीय कर्मचारी को ५%की रियायत है ,आज की अख़बार में मैंने एक बिल्डर का विज्ञापन पड़ा जिसमे की अफोर्डेबल  हाउस के नाम से विज्ञापन दिया था ६१४ वर्ग फुट का जिसकी कीमत १५००/  प्रति वर्ग फिट है .विज्ञापन पड़ कर बहुत अच्छ लगा , एक नया ट्रेंड चालू हो गया है  पर कीमत मुझे कुछ ज्यादा लग रही है इस की कीमत १२०० /- वर्ग फुट होनी चाहिए यह ट्रेंड जल्द ही बिलासपुर में चालू होने वाला है ! यह कोरबा, दुर्ग, भिलाई , रायगढ़  जैसे शहरो  के लिये आने वाले समय में वरदान साबित होगा क्योकि नोकरी पेशा लोग इस को किराये पर लेना ज्यादा पसंद करेगे जो आस पास में रहते है पर काम जिन का इन जगहों पर है पर परिवार किन्ही कारणों से ग्रामीण या अर्ध  शहरी  छेत्रों में रहते है

Wednesday, February 10, 2010

market ka haal

जैसा की मैंने पहले ही कहा था की बिलासपुर के प्रोपर्टी मार्केट में जनवरी के बाद उछाल आने की उम्मीद थी उस की शुरुवात हो चुकी है जनवरी में चुनाव के बाद से प्रोपर्टी मार्केट में उठाव आना चालू हो गया है और यह मार्च के अंत तक प्रोपर्टी मार्केट में बहार चलती रहेगी. और जहा तक अभी मुझ को लग रहा है की बरसात आते तक मार्केट और उचा उठ सकता है क्यों की इस साल सुनने में आया है की सरकारी रजिस्ट्री के रेट  ज्यादा नहीं बड़ने वाले और कुछ जगहों पर कम भी हो सकते है . तो फिर बरसात आने तक मार्केट ठीक ठाक चलता रहेगा. क्योकि मार्च के अंत तक व्यापारी और नौकरी पेशा लोग प्रोपर्टी लेने पर ज्यादा सक्रीय रहते है . और अगर सरकारी रजिस्ट्री के रेट नहीं बड़ते तो अन्य लोग जो प्रोपर्टी खरीदने का विचार कर रहे है वो कुछ दिन रुक भी सकते है और यह सिलसिला जून तक चाल सकता है कहने का मतलब है की मार्च के अंत तक जो महा बूम आता है उस में कमी हो सकती है क्योकि बैंको के ब्याज दर को लेकर भी अभी अनिशचित्ता चल रही है. और सरकारी रजिस्ट्री के रेट ज्यादा नहीं बड़ने और कुछ स्थानों में कम होने की भी चर्चा है पर अभी अधिकारिक तौर इस बात की पुष्टि नहीं हुई है .पर मार्केट में प्रोपर्टी की मांग शुरू हो गई है !

Wednesday, January 20, 2010

बिलासपुर में भी है दुबई जैसा प्रॉपर्टी मार्केट का हाल



बिलासपुर में भी है दुबई जैसा प्रॉपर्टी मार्केट का हाल  पड़ने के बाद शायद विस्वास न हो पर अलग राज्य बनने के बाद  हर छोटे शहरो का ये ही हाल  है.छत्तीसगढ़ बनने के बाद  बिलासपुर भी इस से अछुता नहीं है ! बिलासपुर में  तोरवा पुल  से मोपका जाते तक, जो रेगिस्थान  धान मंडी से चालू होता है, और मोपका तक   दिखता है!
सहकारी हाउसिंग कालोनियों के नाम पर जो लोगो ने हाउसिंग प्रोजेक्ट और ले आउट में जो भी  निवेश किया है उस की हालत सब के सामने है!  15 साल पहले २०/ प्रति वर्ग फुट की जमीन आज ४०/प्रति वर्ग फुट  में भी नहीं बिक रही है जबकि उस के सामने ४५०/ आज प्रति वर्ग फुट का भाव है. यह तो पुरानी बात हो गई!
अब व्यापार विहार  यहाँ का नया दुबई जैसा प्रोपर्टी मार्केट बन गया है ....कैसे ???
 हम आज से दो साल पीछे जाते है व्यापार विहार में रोड के किनारे की जमीन 1200 से 1500 वर्ग फुट पर मिल रही थी ! BDA ने जो व्यापार विहार में व्यासायिक जोन के छोटे-छोटे भूखंड १५-१७  साल पहले बना कर बेचे थे! कुछ सालो के बाद उन्हें लेने वाला कोई नहीं मिल रहा था बाद में एक खरीदी -बिक्री का एक नया ट्रेंड बना और खूब जमकर खरीदी -बिक्री हुई पर आज  उन भूखंड  को लेने के लिये खरीदार नहीं मिलते है ! यहाँ पर श्री राम टावर एक गार्डन  और व्यापर विहार की थोक मंडी के सिवाय कुछ नहीं था!  इन दो सालो में  जैसे-जैसे  यहाँ पर प्रोजेक्ट बनने लगे और व्यापार विहार में व्यासायिक जोन का नक्शा बदला की यहाँ पर प्रोपर्टी लेने और बेचने का ट्रेंड शुरू हो गया इस बिच कुछ बड़ी और छोटी कार्पोरेट कम्पनियों के दफ्तर भी आ गये कुछ बहुत बड़े आवासीय प्रोजेक्ट भी बिक गए व्यापार विहार ऐसा  जोन बन गया जहा पर हर छोटा बड़ा प्रोपर्टी निवेशक निवेश कर रहा था! बहुत से छोटे निवेशको के कर्ज लेकर भी यहाँ निवेश किया!  २५०/  वर्ग फुट से ८००/ वर्ग फुट की जमीन दो सालो में यहाँ पर २५००/ से ८०००/  के बिच में है. और आज की तारीख में कुछ एक जोन को छोडकर कही भी उन्हें लेने वाले नहीं मिल रहे है. बहुतो के पैसे फसे है और कुछ और लोग आस लगा कर रखे है की रेट और बढेंगे.इस बिच इस व्यापार विहार में व्यासायिक जोन और उस के सामने का कुछ काया कल्प जरुर हुआ है. पर ज्यादा विकास BDA जोन के सामने हुआ है! आज यहाँ पर भी हालात वैसे है जैसा बिच में दुबई के रियल स्टेट मार्केट के गुबारा फूटने पर हुआ था ! दोनों में समानता सिर्फ यही है की लोग कीमत की परवाह नहीं कर रहे थे भविष्य क्या होगा यह  किसे ने नहीं सोच था!बस सोच यही थी की प्रोपर्टी की कीमत बढेगी ! मैं भी नहीं समझ पा रहा हु की इन भूखंडो के खरीदार कौन होंगे !
आज सीपत NTPC के आस-पास प्रोपर्टी में  रिवर्स गेयर लगना चालू हो गयाहै ! वहा पर भी कोई ज्यादा रूचि नहीं ले रहा है ! जबकि आज रायपुर रोड में प्रोपर्टी की कीमते  बढती जा रही है खास कर बिल्हा मोड़ तक क्यों ? क्योकि पिछले ५ सालो से रियल स्टेट मार्केट के  बड़े निवेशक रायपुर रोड में गुबारा फुला रहे है! छोटे निवेशक और ब्रोकर इन गुबारों में हवा भरने और रंग भरने का का कर रहे है!  यहाँ पर भी गुबारा फूटेगा पर कुछ वक़्त लगेगा क्योकि अभी गुबारे फुलाने वाले इसे फोड़ना नहीं चाहते ! क्योकि यहाँ पर रेगिस्तान बनना चालू हुआ है! प्रोपर्टी मार्केट का ट्रेंड भी कुछ ऐसा ही है
हमेशा छोटे छोटे निवेशक इस रेगिस्तान में फंस जाते है!  रेगिस्तान बनता कोई और है और नाम किसी  का हो जाता है . जैसा की मोपका में हुआ था

जहा तक मैंने अभी प्रोपर्टी मार्केट को समझा है की रियल स्टेट मार्केट में गुबारा फुलाना कोई बहुत बड़ी बात नहीं बस कुछ मजबूत हाथ को आपस में मिलाने वाला मिल जाये. फिर चाहे उस एरिया का रियल स्टेट मार्केट रिवर्स गेयर में हो या फिर गुबारा फुट चूका हो. " गुबारा फूलेगा ही " !
हां यह उन मजबूत हाथो को मिलाने वाले की योग्यता पर निभर करता है की वो रियल स्टेट मार्केट में गुबारा कैसे फुलाता  है और कहा फुलाता  है !