Wednesday, January 12, 2011

Property Valuation




मैंने प्रापर्टी का वैल्यूएशन के बहुत से लेख पड़े है बहुत सी रिपोर्ट पड़ी है जिअसे में से इंटरनैशनल वैल्यूएशन स्टैंडर्ड्स कमिटी की रिपोर्ट (USPAP) की रिपोर्ट . प्रापर्टी का वैल्यूएशन कई कारणों से किया जाता है जैसे- खरीद-फरोख्त, कैपिटल इन्वेस्ट , कर निर्धारण, आर्थिक नियमितता विवादों का निवारण आदि .  आज दुनियाभर के निवेशक प्रॉपर्टी  की बाजार कीमत से अधिक प्रापर्टी के मूल्यांकन पर ध्यान अधिक दे रही है  फिर बात चाहे निवेश की हो, रिस्क प्रोफाईल की या फिर स्टेट्समेंट्स में उल्लेख करने की, प्रापर्टी की कीमत पर ही अधिक ध्यान दिया जाता है . Uniform Residential Appraisal Report, that comply with the Uniform Standards of Professional Appraisal Practice (USPAP)  . की गाइड लाइन में प्रॉपर्टी वैल्यूएशन पर रिपोर्ट पेश की है.  'इंटरनैशनल वैल्यूएशन स्टैंडर्ड्स कमिटी' "इंटरनैशनल वैल्यूएशन स्टैंडर्ड्स" के आठ एडिशन प्रकाशित कर चुकी है . प्रॉपर्टी के वैल्यूएशन का तरीका भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार एक लेख प्रस्तुत है  
 कोई भी  प्रॉपर्टी मे समानता नहीं होती है , उनमें कुछ न कुछ अंतर जरूर होता है  इन्वेस्टमेंट के लिहाज इसे अलग अलग करना जरुरी है  विशेष कर  जब प्रॉपर्टीज की लोकेशंस अलग-अलग हों। लोकेशन प्रॉपर्टी की कीमत तय करने का मुख्य आधार होती है। इसके बाद, प्रॉपर्टी की उम्र, कंस्ट्रक्शन आदि चीजों पर गौर किया जाता है  अंत में, ये सब बातें मिलकर प्रॉपर्टी की वास्तविक कीमत निर्धारित करती हैं . निर्धारण के इस तरीके को प्रॉपर्टी का वैल्यूएशन कहते हैं . 


प्रॉपर्टी का वैल्यूएशन कई कारणों से किया जाता है, जैसे - खरीद-फरोख्त, कैपिटल इन्वेस्टमेंट, फाइनैंशल रिपोर्टिन्ग, टैक्स सेटलमेंट, फाइनैंशल रेगुलेशन, विवादों का निवारण आदि. आज दुनियाभर की फाइनैंशल कम्यूनिटी प्रॉपर्टी की मार्किट प्राइज से ज्यादा प्रॉपर्टी की वैल्यू पर ध्यान दे रही है . फिर चाहे बात इन्वेस्टमेंट की हो, रिस्क प्रोफाइल की या फिर फाइनैंशल स्टेटमेंट्स में उल्लेख करने की, प्रॉपर्टी की वैल्यू पर ही ज्यादा ध्यान दिया जाता है . 


ग्लोबलाइजेशन के मौजूदा दौर में भारत में एफडीआई भी बढ़ा है और रीयल एस्टेट की विदेशी कंपनियां यहां अपने ऑफिस भी खोल रही हैं . ऐसे में वैल्यूएशन के लिए एक समान अंतरराष्ट्रीय मानक अपनाने की जरूरत महसूस की जाने लगी है. इस कड़ी में 'इंटरनैशनल वैल्यूएशन स्टैंडर्ड्स कमिटी' 'इंटरनैशनल वैल्यूएशन स्टैंडर्ड्स' के आठ एडिशन प्रकाशित कर चुकी है। दुनियाभर के प्रफेशनल संस्थान इन स्टैंडर्ड्स को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर एक जैसा अप्रेसल सिस्टम लागू हो सके। 


बहरहाल, रीयल एस्टेट अप्रेसल के विभिन्न तरीकों के आधार पर प्रॉपर्टी की वैल्यू की कई रूपों में गणना की जा सकती है जैसे - 


Market Value ,Value-in-use,Investment Value ,Insurable Value ,Liquidation Value ,Price Value , Valuation,


Market Value


मार्किट वैल्यू वह आंकड़ा है, जिस पर प्रॉपर्टी बाजार में बेची जा सकती है . 'इंटरनैशनल वैल्यूएशन स्टैंडर्ड्स' के अनुसार, मार्किट वैल्यू वह रकम है, जिस पर प्रॉपर्टी का सौदा वैल्यूएशन के तुरंत बाद किया जाए। यह वैल्यूएशन संभावित खरीदार और विक्रेता के बीच पर्याप्त माकेर्टिन्ग, जानकारी के आदान-प्रदान और किसी दबाव के बिना होना हो  


Value-in-use 


अगर कोई प्रॉपर्टी किसी विशेष उपभोक्ता के लिए विशेष प्रयोजन के तहत रकम उपलब्ध करा सकती है, तो उस कीमत को 'नेट प्रजेंट वैल्यू' या 'वैल्यू इन यूज' कहेंगे ,कि 'वैल्यू इन यूज' किसी विशेष उपभोक्ता के संदर्भ में होती है, सामान्य रूप में नहीं ऐसे में यह रकम प्रॉपर्टी की मार्किट वैल्यू से कम भी हो सकती है और उससे ज्यादा भी हो सकती है  


Investment Value 


जब विशेष उपभोक्ता प्रॉपर्टी का इन्वेस्टर हो, तो 'वैल्यू इन यूज' को 'इन्वेस्टमेंट वैल्यू' कहा जाता है . यह भी प्रॉपर्टी की मार्किट वैल्यू से कम या ज्यादा हो सकती है 


Insurable Value 


' इन्शुअरेबल वैल्यू' प्रॉपर्टी की वह कीमत है, जो किसी इन्शुअरन्स पॉलिसी में इन्शुअरन्स कंपनी द्वारा तय की जाती है। आमतौर पर इसमें साइट वैल्यू शामिल नहीं की जाती है .


Liquidation Value 


दिवालियेपन की स्थिति में प्रॉपर्टी की जो वैल्यू आंकी जाती हैं, उसे 'लिक्विडेशन वैल्यू' कहते हैं। यह प्रक्रिया कानूनी आदेश के बाद या मजबूरी में अपनाई जा सकती है 


Price Value 


कई लोग 'प्राइज वैल्यू' को 'मार्किट वैल्यू' के साथ कन्फ्यूज कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. दोनों के बीच अंतर पहचानना जरूरी है . किसी विशेष प्रॉपर्टी के लिए विशेष डील में हासिल रकम उस प्रॉपर्टी की 'प्राइज वैल्यू' कहलाएगी. यह रकम मार्किट प्राइज के बराबर हो भी सकती है और नहीं भी .


Valuatoin 


प्रॉपर्टी के वैल्यूएशन के लिए आमतौर पर तीन प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें 'थ्री अप्रोच्स टू वैल्यू' कहते हैं। ये हैं, 


1Sales Comparison Approach 


2. The Cost Approach


3. Income Approach


Sales Comparison Approach  (द सेल्स कंपेरीसन अप्रोच : मार्किट में बेची जा रही एक जैसी प्रॉपर्टीज के प्राइज/यूनिट या कुल कीमत का आकलन करने के लिए इस विधि का सहारा लिया जाता है। अगर कई यूनिट्स बेची जानी हों, तो उनके वैल्यूएशन के लिए इस विधि को सबसे सही माना जाता है . 


The Cost Approach ( द कॉस्ट अप्रोच ) - अप्रेसल की इस विधि को 'समेशन अप्रोच' भी कहा जाता है इस प्रक्रिया के अंतर्गत यह तर्क काम करता है कि जमीन की वैल्यू और उस पर कंस्ट्रक्शन की डेप्रिसिएशन वैल्यू को जोड़कर प्रॉपर्टी की वैल्यू का अनुमान लगाया जा सकता है यह प्रक्रिया किसी नई प्रॉपर्टी के वैल्यूएशन के लिए ज्यादा सही रहती है 


Income Approach (द इनकम अप्रोच) - इसका प्रयोग आमतौर पर इन्वेस्टमेंट के लिए खरीदी जाने वाली प्रॉपर्टी के वैल्यूएशन के लिए किया जाता है अप्रेसर आमतौर पर कमर्शल या ऑफिस प्रॉपर्टी के इन्वेस्टर्स के लिए इस प्रक्रिया का प्रयोग करते हैं इसके अंतर्गत, डाइरेक्ट कैपिटलाइजेशन, डिस्काउंटेड कैश फ्लो और ग्रॉस रेंट मल्टीप्लायर जैसी विधियों से वैल्यू निकाली जाती है  जिसमें मुख्य जोर प्रॉपर्टी से होने वाली सालाना इनकम पर रहता है. 


किसी प्रॉपर्टी की सही वैल्यू निर्धारित करने के लिए इनमें से कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जाए, इसका फैसला अप्रेसर करता है . इसके पीछे मुख्य आधार यह होता है कि प्रॉपर्टी खरीदने वाला कौन है और वह किस उद्देश्य से प्रॉपर्टी ले रहा है , अगर कोई इन्वेस्टर प्रॉपर्टी ले रहा है, तो वैल्यूएशन के समय उससे होने वाली इनकम को ज्यादा तवज्जो दी जाएगी, जबकि कमर्शल या ऑफिस प्रॉपर्टी के वैल्यूएशन के समय ज्यादा ध्यान सेल्स पर देना पड़ता है। 


अपार्टमेंट का वैल्यूएशन करते समय भी ज्यादा जोर सेल्स पर ही रहता है, क्योंकि हर अपार्टमेंट का अपना अलग वैल्यूएशन होता है और एक की कीमत दूसरे से अलग हो सकती है . सिंगल फैमिली के रहने के लिए तैयार किए जाने वाले इंडीपेंडेंट हाउस में भी सेल्स कंपेरीसन अप्रोच अपनाई जाती है, लेकिन अगर यह इंडीपेंडेंट हाउस किसी ऐसी लोकेशन पर है, जहां ज्यादातर मकान किराये पर उठाए गए हैं, तो सेल्स कंपेरीसन अप्रोच की बजाय इनकम अप्रोच अपनाना सही रहता है

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